Sunday, 20 December 2015

भारत देश दुनिया का सबसे बड़ा बाजार...ऐसा बचपन से ही हम सोचते रहे हैं। जबकि सियासी दलों ने भी विकास के नाम पर कहीं ना कहीं दुनिया का सबसे बड़ा बाजार वाले स्लोगन का ही तवा अपनी सियासी रोटी सेंकने के लिए किया है। लेकिन क्या हमने कभी सोंचा हैं कि सभी ऐसा कहते क्यों हैं....ऐसा इसलिए है क्योंकि सबसे सस्ता लेबर मन लगाकर और डर के साथ अपनी नोौकरी को बचाने की जद्दोजहद में भारतीय पूरी तल्लीनता और तमयता के साथ कंपनी के उत्थान और अपने परिवार के लिए दो जून की रोटी के जुटाने में लग जाता है। यहां पर विकासपरक सोंच नही है। सबकी सोंच यही है कि एक अदद नौकरी मिल जाए तो जीवन को सफल माना जाए।
हालांकि सही भी है...क्योकि यहां पर अलग कुछ करना या उसकी कोशिश करने वालों को समाज झेलता नही है। इतने लेख का यही मकसद था कि कृपया अपनी जिम्मेदारियो को समझिए...देश का उत्थान मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी से नही चलने वाला ...देश के लिए कुछ करो सरकार...ऐसा करो कि देश दुनिया का सबसे बड़ा बाजार बने लेकिन उसने भारत में बनने वाली साजो सामानों की धूम हो...वरना फिर कोई बिचौलिया आएगा और हमारे देश की खुशियां लूट ले जाएगा।
कुछ करिए सरकार....अब उठिए सरकार

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